
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, गुरूवार, 26 फरवरी 2026
卐 धर्म- कर्म 卐
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=====-: हमारे हिंदू धर्म में एकादशी तिथि, व्रत को खास महत्व दिया जाता है। हर महिने में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दो एकादशी पड़ती है, और पूरे वर्षभर में 24 एकादशी पड़ती है। प्रत्येक एकादशी तिथि का अपना अलग अलग महत्व भी होता है। इन्हीं सब में से एक है आमलकी एकादशी, जिसे अमला एकादशी, रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। आमलकी एकादशी प्रतिवर्ष फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष में आती है। आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी और आंवले के वृक्ष की पूजा आराधना की जाती है। काशी में आमलकी एकादशी तिथि से ही होली त्योहार की शुरुआत भी होती है, इसलिए इसे रंगभरी एकादशी भी कहतें हैं। धार्मिक मान्यतानुसार इस आमलकी एकादशी व्रत को सच्ची श्रद्धा भक्तिभाव के साथ करने से पापों कष्टों का अंत होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यतानुसार आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु जी का वास माना जाता है। इसलिए आंमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष का पूजन और आंवले के सेवन से विशेष फल की प्राप्ति होती है, ऐसा माना जाता है। आमलकी एकादशी व्रत पूजन से जीवन में सुख समृध्दि शांति आती है। हिन्दी पंचांग के अनुसार आमलकी एकदशी की यह तिथि इस बार 26 फरवरी रात में 12:33 बजे से शुरू होकर 27 फरवरी शुक्रवार दिन में 10:32 बजे तक रहेगी। इस बार 2026 में आमलकी एकादशी का यह व्रत 27 फरवरी शुक्रवार को रखा जायेगा। हिंदू धर्म के अनुसार उदया तिथि का व्रत अधिक मान्य रहता है। एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी दिन शनिवार को सुबह 06:47 बजे से लेकर सुबह 09:06 बजे तक किया जा सकता है। इस वर्ष आमलकी एकादशी तिथि पर कई संयोग भी बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धियोग , रवि योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग जैसे शुभ संयोग इस आमलकी एकादशी तिथि को को भी विशेष बना रहे हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ योगों में दान- पुण्य, पूजा-पाठ आदि करने से व्रत का कई गुना फल प्राप्त होता है। आमलकी एकादशी पर व्रत पूजन का विधान-: इस दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व जागकर सुबह जल्दी स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए भगवान विष्णु जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। घर में पूजा स्थल में दीप प्रज्वलित करके, धूप दीप, तुलसीदल, पुष्प फल आदि भगवान विष्णु जी को अर्पित करना चाहिए ” ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का यथाशक्ति जप करना चाहिए। आमलकी एकादशी तिथि पर आंवले के वृक्ष की पूजा वंदना विशेष फलदायी भी मानी जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष पर शुद्ध जल अर्पित करके वृक्ष के नीचे दीपक प्रज्वलित करना चाहिए इस दिन दिनभर व्रत उपवास करते हुए संध्याकाल में भगवान लक्ष्मी- नारायण को भोग प्रसाद अर्पित करके आरती करने के बाद स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। व्रत उपवास के दिन चावल दाल, अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए । इस दिन तामसिक चीजें मांस मदिरा आदि से भी बचना चाहिए। व्रत के दिन दिन में शयन नहीं करना चाहिए। व्रत वाले दिन नाखून बाल आदि नहीं कटवाना चाहिए। व्रत के दिन ईर्ष्या क्रोध छल कपट झूठ आदि से भी बचना चाहिए। भगवान को भोग में आंवले से बनी हुई चीजें, मखाने की खीर, साबूदाना,श्रीफल, शुद्ध घी से बनी हुई मिठाईयां आदि चढ़ाई जा सकती हैं। इस दिन जरूरतमंद लोगो को यथाशक्ति अन्न दान, वस्त्र दान, आंवले के फल का दान आदि करना शुभफलदायक माना जाता है।।ऐसी मान्यता है कि आमलकी एकदशी तिथि पर भगवान श्री हरि विष्णु और देवी लक्ष्मी जी की विधिवत रूप से पूजा आराधना करने से मनुष्य जीवन के हर एक दुख दर्द दूर होते हैं और जीवन में सुख सौभाग्य समृद्धि शांति की प्राप्ति होती है। ( यहां पर दी गई जानकारी पूर्ण रूप से ज्योतिषीय गणनाओं पर और प्राचीन मान्यताओं पर आधारित है। और अधिक जानकारी के लिए पाठकगण शास्त्र या अपने क्षेत्र के विद्वान योग्य पंडित से जानकारी अवश्य ले सकते है) कोई भी पूजा-पाठ कर्म में सच्ची श्रद्धा भक्तिभाव होना आवश्यक है। ईश्वर की आराधना वंदना में बाहरी आडबंर से अधिक महत्व ह्रदय से की हुई वंदना श्रद्धा सच्ची श्रद्धा का महत्व ज्यादा होता है। ईश्वर को किसी भौतिक वस्तुओं की आवश्यकता नहीं होती है, ईश्वर मनुष्य से केवल सच्चा प्रेम भक्तिभाव श्रद्धा और अच्छे कर्म करना पसंद करते है। जीवन में हम मन से भी किसी भी प्राणी जीव को न सताएं, छल कपट, ईष्र्या द्वेष दंभ से दूर रहते हुए परोपकार सेवा भाव से सच्चे कर्म करते हुए जीएं यही तो परमपिता परमेश्वर की भी ईच्छा है । आज जो कुछ भी उस परमपिता परमेश्वर की कृपा से हमारे आपके पास है, उनका अनुग्रह मानते हुए हर पल हमको ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए। भौतिक सुख समृद्धि के लिए किसी को अनावश्यक परेशान नहीं करना चाहिए। सदा सत्य मार्ग पर चलना जरूरतमंद लोगों की हमेशा सहयाता करना यही सच्ची ईश्वर भक्ति और पूजा भी है।













